कुंडलिनी (कविता)

कुंडलिनी हे योग शक्ति , जगत माता शिव भक्ति, जगदम्बा जननी जगत की, सदाशिव योगेश्वर अनंता, अम्बिका ज्ञानधारा जीवन की; कुंडलिनी हे अपार शक्ति, संतोषप्रिया अपूर्व समृद्धि, ज्ञानज्योति ज्ञानचक्षु की, धर्मबुद्धि योगपूर्ण समता, शक्ति हर्षित शांत मन की; कुंडलिनी हे आत्मशक्ति, प्रकाशपुंज अदम्य विरक्ति, प्रबल शक्ति पवित्र मन की, कांति नारायणी आनंदी, अमर शोभा मुनि … Continue reading कुंडलिनी (कविता)

ईश्वर

यह एक महान खेद का विषय है कि संसार के अधिकांश लोग अपने मृत्यु के समय तक यह नहीं जान पाते कि वास्तव में यह संसार नहीं अपितु ईश्वर ही मनुष्य का परम आश्रय है तथा ईश्वर ही मानव जीवन का सार है और ईश्वर से मिलन में ही मानव जीवन की सार्थकता है। संसारी … Continue reading ईश्वर

भगवान सदाशिव (कविता)

  भगवान सदाशिव जैसे कोपलों में खिलता जीवन, शिव अपूर्व सौंदर्य, साहस और प्रेम पूर्ण चितवन, सदाशिव जैसे सार्थक हुआ जीवन उमंग से तर, शिव साकार करते सत्य को सत्य के धरातल पर, जैसे ज्वाला की ज्योति, माला कि मोती और पूर्ण, शिव हैं अधिपति श्रृष्टि के, उमा पति योगी सम्पूर्ण, आशुतोष ओमकार ब्रह्म ध्वनि … Continue reading भगवान सदाशिव (कविता)